अब भारत में प्रॉपर्टी मानी जाएगी Cryptocurrency, जानिए मद्रास हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में क्या कहा

Sachin Singh
Written by: Sachin Singh

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भारत की डिजिटल फाइनेंस दुनिया के लिए ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मद्रास हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पहली बार यह साफ कर दिया है कि क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) जैसे Bitcoin, Ethereum, XRP जैसी डिजिटल करेंसी को अब भारतीय कानून के तहत प्रॉपर्टी यानी संपत्ति माना जाएगा. इस फैसले से देश की बढ़ती क्रिप्टो इंडस्ट्री को न सिर्फ कानूनी मान्यता मिली है, बल्कि निवेशकों को भी एक मज़बूत सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ है.

मद्रास हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

यह मामला Rhutikumari बनाम Zanmai Labs Pvt. Ltd. (WazirX) से जुड़ा था, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने 3,532.30 XRP टोकन की अनधिकृत ट्रांसफर को लेकर शिकायत दर्ज की थी. उन्होंने कोर्ट से अपील की कि क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति के रूप में कानूनी सुरक्षा दी जाए ताकि वे अपने डिजिटल होल्डिंग्स की रक्षा कर सकें.

जस्टिस एन. आनंद वेंकटेश ने अपने फैसले में कहा कि भले ही क्रिप्टोकरेंसी भारत में लीगल टेंडर यानी कानूनी मुद्रा नहीं है, लेकिन यह संपत्ति के जरूरी गुणों को पूरा करती है, क्योंकि इसे स्वामित्व, हस्तांतरित और ट्रस्ट में रखा जा सकता है. कोर्ट ने फिलहाल आदेश दिया कि विवादित डिजिटल एसेट्स को ट्रांसफर या डिसॉल्व करने पर रोक रहेगी.

निवेशकों के लिए बड़ी राहत

इस फैसले के बाद अब भारतीय निवेशकों को कानूनी संरक्षण मिलेगा. अगर किसी निवेशक के साथ धोखाधड़ी, चोरी या एक्सचेंज फेलियर जैसी समस्या होती है, तो वे अब सीधे कानूनी राहत पा सकेंगे.

साथ ही, अब क्रिप्टो एक्सचेंजों को भी पारदर्शिता और निवेशकों की सुरक्षा के लिए बैंक जैसे मानकों का पालन करना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में क्रिप्टो मार्केट में विश्वास और निवेश दोनों बढ़ेंगे.

‘क्रिप्टो इकोनॉमी के लिए माइलस्टोन’

एडुल पटेल, सीईओ, Mudrex ने कहा, ‘यह फैसला निवेशकों के लिए जीत है. भारत को अब एक ऐसा संतुलित रेगुलेटरी सिस्टम तैयार करना होगा जो निवेशकों की सुरक्षा के साथ-साथ टेक्नोलॉजी को बढ़ावा दे.’

अविनाश शेखर, को-फाउंडर, Pi42 ने बताया, ‘यह फैसला भारत की वित्तीय सोच में परिपक्वता का संकेत देता है. यह क्रिप्टोकरेंसी को एक वैध आर्थिक एसेट के रूप में देखने की दिशा में बड़ा कदम है. वहीं कानूनी विशेषज्ञ चंदन गोस्वामी ने कहा कि यह फैसला ऐतिहासिक तो है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में इसकी चुनौती संभव है. फैसला मजबूत जरूर है लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट में जांच का सामना करना पड़ सकता है यह देखना दिलचस्प होगा कि देश की शीर्ष अदालत इस फैसले को कितना स्थायी बनाती है.’

भारत अब विश्व के साथ कदम मिलाकर

मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला भारत को सिंगापुर, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों की श्रेणी में ला खड़ा करता है, जहां डिजिटल एसेट्स को पहले से ही प्रॉपर्टी के रूप में मान्यता प्राप्त है.

हालांकि, अभी भी भारत में क्रिप्टो के लिए स्पष्ट रेगुलेशन या टैक्स ढांचा नहीं है, ऐसे में उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सकारात्मक शुरुआत जरूर है, लेकिन स्थायी स्थिरता के लिए ठोस कानून की जरूरत बनी हुई है.

भारत में क्रिप्टो को मिला कानूनी चेहरा

मद्रास हाईकोर्ट का यह फैसला भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और फिनटेक सेक्टर के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है. अब डिजिटल करेंसी रखने वाले निवेशक अपने हक की लड़ाई कानूनी तौर पर लड़ सकेंगे. यह न केवल ब्लॉकचेन और वेब3 इंडस्ट्री के लिए राहत की खबर है, बल्कि भारत को वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था का अग्रणी देश बनाने की दिशा में भी अहम कदम है.

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सचिन सिंह 4 साल से मीडिया में अपनी सेवा दे रहे हैं. इस दौरान उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर न्यूज कंटेट राइटर के तौर पर काम किया है. वह टेक, ऑटो, एंटरटेनमेंट और इस्पोर्ट्स पर लिखने में रुची रखते हैं.

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