Amazon AI protest: अमेज़न में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज़ विस्तार को लेकर कर्मचारियों की नाराज़गी खुलकर सामने आ गई है. कंपनी के 1,000 से अधिक कर्मचारियों ने एक ओपन लेटर पर हस्ताक्षर कर चेतावनी दी है कि अमेज़न की यह तेज रफ्तार AI रणनीति लोकतंत्र, नौकरियों और पृथ्वी के लिए खतरा बन सकती है.
द गार्डियन ने बुधवार को इस चिट्ठी की पुष्टि की, जो अब तक किसी बड़ी टेक कंपनी के अंदर से उठी सबसे बड़ी AI विरोधी आवाज़ों में से एक है.
कौन लोग इस विरोध में शामिल?
इस ओपन लेटर में इंजीनियर, प्रोडक्ट मैनेजर और वेयरहाउस वर्कर्स शामिल हैं. सिर्फ अमेज़न ही नहीं Meta, Google, Apple और Microsoft के 2,400 से ज्यादा कर्मचारियों ने भी इसे सपोर्ट किया है. यह दर्शाता है कि बिग टेक कंपनियों के अंदर से ही AI को लेकर चिंता बढ़ रही है.
AI के कारण हुई छंटनियों ने बढ़ाई चिंता
हाल ही में अमेज़न ने अपने कई डिपार्टमेंट में बड़े पैमाने पर layoffs किए हैं, जिसका सीधा संबंध AI ऑटोमेशन से बताया गया.
कर्मचारियों का कहना है कि
- AI टूल्स की वजह से जॉब सिक्योरिटी खतरे में है.
- निगरानी (surveillance) बढ़ रही है.
- प्रोडक्टिविटी को लेकर बेवजह दबाव डाला जा रहा है.
- पर्यावरण पर इसका भारी असर पड़ रहा है.
इसी के चलते कर्मचारियों ने कंपनी को एक स्पष्ट संदेश देने का फैसला लिया.
क्यों यह विरोध महत्वपूर्ण है?
यह विरोध इसलिए बड़ा है क्योंकि
- यह दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक के अंदर से हो रहा है.
- जनरेटिव AI कंपनियों के काम करने के तरीके को बदल रहा है.
- कर्मचारियों का कहना है कि AI से हेडकाउंट और वर्कफ़्लो दोनों तेजी से प्रभावित हो रहे हैं.
यह भी स्पष्ट हो रहा है कि AI की ऊर्जा खपत और रोजगार पर असर को लेकर चिंताएx सिर्फ बाहरी संस्थाओं की नहीं हैं, बल्कि उन्हीं टीमों के भीतर से उठ रही हैं जो AI बनाती हैं.
समय ऐसा क्यों कि विरोध अभी शुरू हुआ?
ओपन लेटर ऐसे वक्त आया है जब:
- अमेज़न ने नई AI ऑटोमेशन से जुड़ी छंटनियां की हैं.
- अमेरिका में नए AI आधारित डेटा सेंटर्स पर अरबों डॉलर का निवेश घोषित किया गया है.
- कर्मचारियों पर AI टूल्स के उपयोग का दबाव बढ़ रहा है.
- वर्कर्स का कहना है कि अब कंपनी उनसे AI के कारण दोगुना काम कराने की उम्मीद कर रही है.
एक सीनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने द गार्डियन को बताया, ‘मैनेजमेंट को लगता है कि AI है, तो अब हमें पहले से कहीं ज्यादा काम करना चाहिए.’
दूसरे कर्मचारी ने कहा, ‘AI टूल्स का बहाना बनाकर मनमाने प्रोडक्टिविटी टारगेट दिए जा रहे हैं, जबकि ये टूल्स उतने मददगार नहीं हैं.’
AI से बढ़ रहा पर्यावरणीय खतरा?
- कर्मचारी अमेज़न पर आरोप लगा रहे हैं कि कंपनी क्लाइमेट गोल्स त्यागकर AI पर फोकस कर रही है.
- अमेज़न अगले 15 साल में डेटा सेंटर्स पर $150 बिलियन (करीब ₹12.5 लाख करोड़) खर्च करने जा रहा है.
- कर्मचारियों का कहना है कि इससे कोयला और गैस आधारित ऊर्जा की खपत बढ़ेगी.
- कंपनी के उत्सर्जन (emissions) 2019 से 35% बढ़ गए हैं, जबकि अमेज़न ने 2040 तक नेट-ज़ीरो का वादा किया है.
- कर्मचारियों का कहना है कि यह नई AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पृथ्वी पर भारी बोझ डाल सकता है.
अमेज़न का जवाब
अमेज़न के प्रवक्ता ब्रैड ग्लेसर ने इस आरोप को नकारते हुए कहा:
- कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी पर्चेजर है
- 600 से ज्यादा ग्रीन प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं
- अमेज़न न्यूक्लियर एनर्जी में भी निवेश कर रहा है
कंपनी ने दावा किया कि वह अपने नेट-ज़ीरो लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्ध है.
कर्मचारियों की मांगें क्या हैं?
कर्मचारी AI के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि
- AI को सस्टेनेबल तरीके से बनाया जाए
- डेटा सेंटर क्लीन एनर्जी से चलें
- ऐसे AI प्रोडक्ट्स सीमित किए जाएं जो हिंसा, निगरानी या बड़े पैमाने पर निर्वासन जैसे जोखिम पैदा करें.
- AI के उपयोग पर वर्कर-लैड गवर्नेंस बॉडी बनाई जाए
कई कर्मचारियों ने यह भी कहा कि कंपनी के भीतर डर का माहौल है, इसलिए लोग खुलकर अपनी बात नहीं कह पा रहे.
टेक वर्ल्ड में AI विरोध की नई लहर
सिलिकॉन वैली में AI के रोजगार, पर्यावरण और दुरुपयोग को लेकर चिंताएं पहले भी उठी हैं. लेकिन अमेज़न की यह चिट्ठी इसलिए खास है क्योंकि
- इसमें टेक्निकल, कॉर्पोरेट और वेयरहाउस कर्मचारियों तीनों की आवाज़ शामिल है.
- यह AI के प्रोडक्टिविटी दावों और कार्बन खर्च दोनों पर सवाल उठाती है.
स्पष्ट है कि AI सिर्फ टेक्नोलॉजी का मुद्दा नहीं रहा है, यह अब काम, जलवायु और लोकतंत्र जैसे व्यापक विषयों से जुड़ चुका है.
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